June 21, 2021June 21, 2021भारत के ५१ शक्ति पीठजीवन का सबसे बड़ा आनंद शांति और संतोष है जो आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ है। मंदिर हमेशा सभी के लिए आध्यात्मिक विकास का केंद्र रहे हैं क्योंकि अधिकांश मंदिर शहरी जीवन की परेशानी से मुक्त हैं और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देते हैं। योगी से लेकर सम्राट या आम आदमी तक, शक्ति पीठ आध्यात्मिक विकास के साथ अपनी पार्थिव इच्छाओं को पूरा करने के लिए मां दुर्गा से जुड़ने का एक तरीका है।51 शक्ति पीठ या देवी स्थान भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए मां शक्ति (भगवान शिव की पत्नी) को समर्पित मंदिर हैं । हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और प्रजापति दक्ष की पुत्री देवी सती के विवाह के बाद, प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया, जहां उन्होंने शिव को छोड़कर सभी देवताओं और ऋषियों को आमंत्रित किया, क्योंकि उन्होंने शिव को अपनी बेटी से शादी करने के योग्य नहीं माना. शिव को आमंत्रण ना होने पर भी सती ने यज्ञ में भाग लिया और दक्ष से इसका कारण पूछा. दक्ष ने शिव का अपमान किया, जो सती के लिए असहनीय था, इसलिए उन्होंने अपने जीवन का त्याग कर दिया।इस घटना से भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपनी पत्नी सती के शोक में ‘रुद्र तांडव’ शुरू किया. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का उपयोग किया और सती के शरीर के 51 टुकड़ों किये. जिन स्थानों पर सती के अंग या आभूषण गिरे थे वे पवित्र हो गए और वहां मंदिर बने (प्रत्येक मंदिर में देवी दुर्गा की अलग-अलग अभिव्यक्ति है) को शक्ति पीठ कहा जाता है। सभी शक्ति पीठों में देवी दुर्गा के साथ भैरव भी हैं, जो उनकी विभिन्न अभिव्यक्तियों में हैं।निम्नलिखित सारणी शक्ति पीठों के स्थान और देवताओं का उल्लेख करती है।क्रम सं०स्थानअंग या आभूषणशक्तिभैरव1हिंगुल या हिंगलाज, कराची, पाकिस्तान से लगभग 125 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व मेंब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग)कोट्टरीभीमलोचन2शर्कररे, कराची पाकिस्तान के सुक्कर स्टेशन के निकट, इसके अलावा नैनादेवी मंदिर, बिलासपुर, हि.प्र. भी बताया जाता है।आँखमहिष मर्दिनीक्रोधीश3सुगंध, बांग्लादेश में शिकारपुर, बरिसल से 20 कि॰मी॰ दूर सोंध नदी तीरेनासिकासुनंदात्रयंबक4अमरनाथ, पहलगाँव, काश्मीरगलामहामायात्रिसंध्येश्वर5ज्वाला जी, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेशजीभसिधिदा (अंबिका)उन्मत्त भैरव6जालंधर, पंजाब में छावनी स्टेशन निकट देवी तलाबबांया वक्षत्रिपुरमालिनीभीषण7अम्बाजी मंदिर, गुजरातहृदयअम्बाजीबटुक भैरव8गुजयेश्वरी मंदिर, नेपाल, निकट पशुपतिनाथ मंदिरदोनों घुटनेमहाशिराकपाली9मानस, कैलाश पर्वत, मानसरोवर, तिब्बत के निकट एक पाषाण शिलादायां हाथदाक्षायनीअमर10बिराज, उत्कल, उड़ीसानाभिविमलाजगन्नाथ11गण्डकी नदी नदी के तट पर, पोखरा, नेपाल में मुक्तिनाथ मंदिरमस्तकगंडकी चंडीचक्रपाणि12बाहुल, अजेय नदी तट, केतुग्राम, कटुआ, वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल से 8 कि॰मी॰बायां हाथदेवी बाहुलाभीरुक13उज्जनि, गुस्कुर स्टेशन से वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल 16 कि॰मी॰दायीं कलाईमंगल चंद्रिकाकपिलांबर14माताबाढ़ी पर्वत शिखर, निकट राधाकिशोरपुर गाँव, उदरपुर, त्रिपुरादायां पैरत्रिपुर सुंदरीत्रिपुरेश15छत्राल, चंद्रनाथ पर्वत शिखर, निकट सीताकुण्ड स्टेशन, चिट्टागौंग जिला, बांग्लादेशदांयी भुजाभवानीचंद्रशेखर16त्रिस्रोत, सालबाढ़ी गाँव, बोडा मंडल, जलपाइगुड़ी जिला, पश्चिम बंगालबायां पैरभ्रामरीअंबर17कामगिरि, कामाख्या, नीलांचल पर्वत, गुवाहाटी, असमयोनिकामाख्याउमानंद18जुगाड़्या, खीरग्राम, वर्धमान जिला, पश्चिम बंगालदायें पैर का बड़ा अंगूठाजुगाड्याक्षीर खंडक19कालीपीठ, कालीघाट, कोलकातादायें पैर का अंगूठाकालिकानकुलीश20प्रयाग, संगम, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेशहाथ की अंगुलीललिताभव21जयंती, कालाजोर भोरभोग गांव, खासी पर्वत, जयंतिया परगना, सिल्हैट जिला, बांग्लादेशबायीं जंघाजयंतीक्रमादीश्वर22किरीट, किरीटकोण ग्राम, लालबाग कोर्ट रोड स्टेशन, मुर्शीदाबाद जिला, पश्चिम बंगाल से 3 कि॰मी॰ दूरमुकुटविमलासांवर्त23मणिकर्णिका घाट, काशी, वाराणसी, उत्तर प्रदेशमणिकर्णिकाविशालाक्षी एवं मणिकर्णीकाल भैरव24कन्याश्रम, भद्रकाली मंदिर, कुमारी मंदिर, तमिल नाडुपीठश्रवणीनिमिष25कुरुक्षेत्र, हरियाणाएड़ीसावित्रीस्थनु26मणिबंध, गायत्री पर्वत, निकट पुष्कर, अजमेर, राजस्थानदो पहुंचियांगायत्रीसर्वानंद27श्री शैल, जैनपुर गाँव, 3 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व सिल्हैट टाउन, बांग्लादेशगलामहालक्ष्मीशंभरानंद28कांची, कोपई नदी तट पर, 4 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व बोलापुर स्टेशन, बीरभुम जिला, पश्चिम बंगालअस्थिदेवगर्भरुरु29कमलाधव, शोन नदी तट पर एक गुफा में, अमरकंटक, मध्य प्रदेशबायां नितंबकालीअसितांग30शोन्देश, अमरकंटक, नर्मदा के उद्गम पर, मध्य प्रदेशदायां नितंबनर्मदाभद्रसेन31रामगिरि, चित्रकूट, झांसी-माणिकपुर रेलवे लाइन पर, उत्तर प्रदेशदायां वक्षशिवानीचंदा32वृंदावन, भूतेश्वर महादेव मंदिर, निकट मथुरा, उत्तर प्रदेशकेश गुच्छ/चूड़ामणिउमाभूतेश33शुचि, शुचितीर्थम शिव मंदिर, 11 कि॰मी॰ कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग, तमिल नाडुऊपरी दाड़नारायणीसंहार34पंचसागर, अज्ञातनिचला दाड़वाराहीमहारुद्र35करतोयतत, भवानीपुर गांव, 28 कि॰मी॰ शेरपुर से, बागुरा स्टेशन, बांग्लादेशबायां पायलअर्पणवामन36श्री पर्वत, लद्दाख, कश्मीर, अन्य मान्यता: श्रीशैलम, कुर्नूल जिला आंध्र प्रदेशदायां पायलश्री सुंदरीसुंदरानंद37विभाष, तामलुक, पूर्व मेदिनीपुर जिला, पश्चिम बंगालबायीं एड़ीकपालिनी (भीमरूप)शर्वानंद38प्रभास, 4 कि॰मी॰ वेरावल स्टेशन, निकट सोमनाथ मंदिर, जूनागढ़ जिला, गुजरातआमाशयचंद्रभागावक्रतुंड39भैरवपर्वत, भैरव पर्वत, क्षिप्रा नदी तट, उज्जयिनी, मध्य प्रदेशऊपरी ओष्ठअवंतिलंबकर्ण40जनस्थान, गोदावरी नदी घाटी, नासिक, महाराष्ट्रठोड़ीभ्रामरीविकृताक्ष41सर्वशैल/गोदावरीतीर, कोटिलिंगेश्वर मंदिर, गोदावरी नदी तीरे, राजमहेंद्री, आंध्र प्रदेशगालराकिनी/विश्वेश्वरीवत्सनाभ/दंडपाणि42बिरात, निकट भरतपुर, राजस्थानबायें पैर की अंगुलीअंबिकाअमृतेश्वर43रत्नावली, रत्नाकर नदी तीरे, खानाकुल-कृष्णानगर, हुगली जिला पश्चिम बंगालदायां स्कंधकुमारीशिवा44मिथिला, जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट, भारत-नेपाल सीमा परबायां स्कंधउमामहोदर45नलहाटी, नलहाटि स्टेशन के निकट, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगालपैर की हड्डीकलिका देवीयोगेश46कर्नाट, अज्ञातदोनों कानजयदुर्गाअभिरु47वक्रेश्वर, पापहर नदी तीरे, 7 कि॰मी॰ दुबराजपुर स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगालभ्रूमध्यमहिषमर्दिनीवक्रनाथ48यशोर, ईश्वरीपुर, खुलना जिला, बांग्लादेशहाथ एवं पैरयशोरेश्वरीचंदा49अट्टहास, 2 कि॰मी॰ लाभपुर स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगालओष्ठफुल्लराविश्वेश50नंदीपुर, चारदीवारी में बरगद वृक्ष, सैंथिया रेलवे स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगालगले का हारनंदिनीनंदिकेश्वर51लंका, स्थान अज्ञात, (एक मतानुसार, मंदिर ट्रिंकोमाली में है, पर पुर्तगली बमबारी में ध्वस्त हो चुका है। एक स्तंभ शेष है। यह प्रसिद्ध त्रिकोणेश्वर मंदिर के निकट है)पायलइंद्रक्षीराक्षसेश्वरSelect your reaction+1 0+1 0+1 0+1 0+1 0 Facebook Twitter Email Telegram Related Temples hindi Temple Circuits DeviSatishaktipeethTemplesTemples of India
Temple Circuits Dilwara Temples – Panch Svetambara Derasar (Part 1) September 29, 2021September 29, 2021The Dilwara Temples, popularly known as ‘Delvada Temples’ are some of the finest Jain Temples known all over the world for their incredible architecture and marvellous marble and stone carvings, having them acquire a superiority over Taj Mahal in the field of architecture by some experts. These temples are situated around 2.5 km from Mount Abu, the only hill station of Rajasthan situated in the Sirohi district. Built between the 11th and 16th centuries AD, these shrines are made up of white marble quarried from Arasur Hills near Ambaji in Banaskantha district, Gujarat, which represents the Maru-Gurjara architecture. Read More
Rajasthan Dilwara Temples – Panch Svetambara Derasar (Part 2) September 29, 2021September 29, 2021Pittalhar Temple, also called Adinatha Temple, is a temple dedicated to Rishabhanatha – the first tirthankara of Jain Dharma and founder of Ikshvaku Vansh. The temple was built by Bhima Shah, a minister in Gujarat Sultanate whose Sultan was Mahmud Begada. Established between 1316-1432 AD, this shrine features a huge metal statue caste out of five metals of the Rishabhanatha Swami – the principal deity of this temple. Read More
Temple Circuits Bahula Devi Mandir (Shakti Peeth) June 26, 2021June 26, 2021Bahula Shaktipeeth is located in Ketugram village on the banks of Ajay river, at about… Read More